ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान (मत्स्यावतार)

भगवान (मत्स्यावतार) नाम मंत्र

मत्स्यदेव

प्रलय, भारी जल-संकट या बाढ़ से रक्षा एवं खोए हुए वेदों (ज्ञान) की पुनः प्राप्ति।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारनाम मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

प्रलय, भारी जल-संकट या बाढ़ से रक्षा एवं खोए हुए वेदों (ज्ञान) की पुनः प्राप्ति।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

प्रलय, भारी जल-संकट या बाढ़ से रक्षा एवं खोए हुए वेदों (ज्ञान) की पुनः प्राप्ति

जाप विधि

जल या नदी के समीप मानसिक जप।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

ugra mantra

ॐ ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा

jap mantra

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥

mool mantra

ॐ नमो हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्

gyan mantra

श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा ॥

kaamya mantra

ॐ पातु शिरसि नित्यं पातु ह्रीं कण्ठदेशके। नृसिंह पातु हृदये आपदुद्धारणाय च॥

kavach mantra

नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20