श्रीमद्भागवतकुंती ने कृष्ण से मोह छुड़ाने की प्रार्थना क्यों की?कुंती ने यदुवंशियों और पांडवों के प्रति मजबूत ममता को काटने और अपनी बुद्धि को गंगा की धारा की तरह कृष्ण में लगाने की प्रार्थना की।#कुंती#मोह#कृष्ण भक्ति
भक्त चरित्रनरसी मेहता की माहात्म्य कथानरसी मेहता (जूनागढ़, 1414-1480 ई.) — गुजराती भक्ति साहित्य के आदि कवि। भाभी के व्यंग्य पर सात दिन शिव-उपासना की, श्रीकृष्ण की रासलीला का दर्शन हुआ। हुंडी, श्राद्ध और नानी बाई के मायरे में श्रीकृष्ण ने स्वयं आकर उनकी सहायता की। 'वैष्णव जन तो' उनकी सर्वप्रसिद्ध रचना है।#नरसी मेहता
भक्ति साहित्यसूरदास के पद कृष्ण भक्ति में कैसे सहायकसूरदास के पद बाल-लीला के वात्सल्य-भाव, माधुर्य-भक्ति और विरह-भाव से कृष्ण-भक्ति जागृत करते हैं। 'मैया मोरी मैंने माखन नाहीं खायो' जैसे पद सीधे हृदय तक पहुँचते हैं।#सूरदास#पद#कृष्ण भक्ति
भक्ति साहित्यमीराबाई के भजन आज भी लोकप्रिय क्यों हैंमीराबाई के भजन इसलिए लोकप्रिय हैं क्योंकि उनमें सच्चे प्रेम की प्रामाणिकता है, भाषा सरल है, और विरह-समर्पण का भाव सार्वभौमिक है। 500 वर्षों बाद भी 'मेरे तो गिरधर गोपाल' हृदय को छू लेता है।#मीराबाई#भजन#कृष्ण भक्ति
संत और भक्तमीराबाई ने कृष्ण भक्ति में क्या सहामीरा ने कृष्ण भक्ति में सहा: ससुराल का अपमान, विष का प्याला, सांप, कांटों की शय्या, सामाजिक बहिष्कार, घर त्याग। 'मेरे तो गिरिधर गोपाल, दूसरो न कोई।' शिक्षा: सच्ची भक्ति = सब कष्ट सहन शक्ति। भक्ति में लोक-लाज गौण।#मीराबाई#कृष्ण भक्ति#विरह