देवी ग्रंथदेवी माहात्म्य और दुर्गा सप्तशती में क्या अंतर है?दोनों एक ही ग्रंथ। देवी माहात्म्य = मार्कण्डेय पुराण का मूल भाग (591 श्लोक)। दुर्गा सप्तशती = वही + अर्ध श्लोक/उवाच गिनकर 700 + षडंग (कवच, अर्गला, कीलक, रात्रि सूक्त, सिद्ध कुंजिका)। 'चण्डी पाठ' भी कहते हैं। तीन चरित्र: महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती। अंगपाठ बिना पाठ अपूर्ण।#देवी माहात्म्य#दुर्गा सप्तशती#चण्डी पाठ
लोकशुंभ-निशुंभ ने स्वर्लोक से क्या छीना था?शुंभ-निशुंभ ने इन्द्र, अग्नि, कुबेर, सूर्य, चंद्र, वायु और वरुण के यज्ञ-भाग और प्रशासनिक अधिकार छीनकर देवताओं को स्वर्ग से निर्वासित कर दिया था।
लोकदेवी माहात्म्य में मधु कैटभ वध कैसे वर्णित है?देवी माहात्म्य में मधु कैटभ वध महामाया की योगनिद्रा और मोहशक्ति से संभव बताया गया है।#देवी माहात्म्य#मधु कैटभ वध#महामाया
लोकविष्णु जी के शरीर से योगनिद्रा कैसे निकली?योगनिद्रा देवी विष्णु के नेत्र, मुख, नासिका, बाहु और हृदय से दिव्य तेज के रूप में निकलीं।#योगनिद्रा निकली#विष्णु#देवी माहात्म्य
लोकदुर्गा सप्तशती में मधु कैटभ कथा कहाँ आती है?दुर्गा सप्तशती के प्रथम चरित्र में मधु कैटभ वध की कथा आती है।#दुर्गा सप्तशती#देवी माहात्म्य#मधु कैटभ
लोकमधु कैटभ कौन थे?मधु और कैटभ विष्णु के कर्णमल से उत्पन्न दो असुर थे, जिन्हें विष्णु ने महामाया की सहायता से मारा।#मधु कैटभ#विष्णु#देवी माहात्म्य
दुर्गा सप्तशतीदुर्गा सप्तशती क्या है?दुर्गा सप्तशती = मार्कंडेय पुराण का विशिष्ट अंश। 700 श्लोक, 13 अध्याय। देवी माहात्म्य या चंडी पाठ भी कहते हैं। शाक्त परंपरा का मूल आधार। महिषासुर वध का ओजस्वी वर्णन। नित्य पाठ से आध्यात्मिक सुरक्षा, साहस और लौकिक ऐश्वर्य।#दुर्गा सप्तशती#700 श्लोक#मार्कंडेय पुराण
पुराण ज्ञानमार्कण्डेय पुराण में क्या लिखा है?मार्कण्डेय पुराण में मुख्यतः दुर्गासप्तशती (देवी माहात्म्य) है जो शाक्त परम्परा का सर्वोच्च ग्रन्थ है। साथ ही राजा हरिश्चन्द्र, दत्तात्रेय, मदालसा की कथाएँ, सूर्योपासना और गृहस्थ-धर्म का वर्णन है। इसमें १३७ अध्याय और ९,००० श्लोक हैं।#मार्कण्डेय पुराण#दुर्गासप्तशती#शाक्त पुराण
पुराण परिचयदेवी भागवत क्या है?देवी भागवत पुराण वेदव्यास रचित 18,000 श्लोक, 12 स्कंधों का ग्रंथ है। इसमें आदि शक्ति महामाया का माहात्म्य, देवी गीता (शाक्त दर्शन), दुर्गा-महिषासुर युद्ध, 108 शक्तिपीठ और नवदुर्गा उपासना का वर्णन है। नवरात्रि में इसका पाठ विशेष पुण्यकारी है।#देवी भागवत#श्रीमद्देवीभागवत#शक्ति पुराण