विस्तृत उत्तर
मधु और कैटभ दो महाबली असुर थे जिनका वर्णन देवी माहात्म्य, देवीभागवत और अन्य पुराणों में मिलता है। कथा के अनुसार महाप्रलय के बाद जब चारों ओर केवल जल ही जल था और भगवान विष्णु योगनिद्रा में थे, तब उनके कान के कर्णमल से इन दोनों असुरों की उत्पत्ति हुई। मधु तमोगुण यानी अज्ञान और जड़ता का प्रतीक माना गया, जबकि कैटभ रजोगुण यानी अहंकार, क्रिया और उग्रता का प्रतीक है। दोनों ने महाशक्ति की तपस्या कर इच्छा-मृत्यु का वरदान पाया और फिर ब्रह्मा जी से वेद छीनकर सृष्टि-कार्य में बाधा डाली। अंत में भगवान विष्णु ने महामाया की सहायता से उनका वध किया।
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