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विस्तृत उत्तर
देवी माहात्म्य की कथा में बताया गया है कि ब्रह्मा जी की स्तुति से प्रसन्न होकर योगनिद्रा देवी विष्णु के शरीर से प्रकट हुईं। वे भगवान के नेत्रों, मुख, नासिका, बाहुओं और हृदय से दिव्य तेज के रूप में निकलीं। इसका अर्थ यह है कि विष्णु की निद्रा कोई शारीरिक कमजोरी नहीं थी, बल्कि देवी शक्ति का ब्रह्मांडीय आवरण था। जैसे ही यह आवरण अलग हुआ, भगवान विष्णु पूर्ण जाग्रत अवस्था में आ गए। फिर उन्होंने मधु और कैटभ का सामना किया और सृष्टि के ज्ञान की रक्षा की।
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