विस्तृत उत्तर
मार्कंडेय पुराण के देवी माहात्म्य के 85वें अध्याय में शुंभ और निशुंभ द्वारा स्वर्लोक पर आक्रमण का विस्तृत वर्णन है। जब इन महापराक्रमी असुरों ने अपनी घोर तपस्या से असीमित शक्तियाँ प्राप्त कर लीं तो उन्होंने देवराज इन्द्र, अग्नि, कुबेर, सूर्य, चंद्र, पवन (वायु) और वरुण के सभी यज्ञ-भाग (Sacrificial shares) और उनके प्रशासनिक अधिकारों को बलपूर्वक छीन लिया। यज्ञ-भाग वे हिस्से हैं जो यज्ञों में प्रत्येक देवता को प्राप्त होते हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने समस्त देवताओं को स्वर्ग से निर्वासित कर दिया। इन्द्र आदि देवताओं को हिमालय जाकर भगवती अपराजिता की स्तुति करनी पड़ी। इसी स्तुति के फलस्वरूप देवी ने कौशिकी और काली का रूप धारण करके शुंभ-निशुंभ, चंड-मुंड और रक्तबीज का वध किया और देवताओं को पुनः स्वर्लोक का आधिपत्य सौंपा।
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