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धनुर्वेद से जुड़े सभी प्रश्न(5)

धनुर्वेद पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दिव्यास्त्र

मंत्र से अस्त्र कैसे चलाया जाता था

दिव्यास्त्र के लिए देव-संबंधित मंत्र का विधिपूर्वक उच्चारण करते हुए बाण धनुष पर चढ़ाया जाता था। मंत्र से देवता की शक्ति अस्त्र में समाती थी। यह विद्या गोपनीय और गुरु-परंपरा से मिलती थी।

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दिव्यास्त्र

अस्त्र और शस्त्र में क्या अंतर है

शस्त्र = हाथ से पकड़कर या फेंककर चलाए जाने वाले हथियार (तलवार, गदा, त्रिशूल)। अस्त्र = मंत्र-शक्ति या दिव्य-शक्ति से चलाए जाने वाले हथियार (ब्रह्मास्त्र, पाशुपतास्त्र)।

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अस्त्र शस्त्र

अग्नि पुराण में धनुर्वेद के कितने भाग बताए गए हैं?

अग्नि पुराण में धनुर्वेद के 4 भाग हैं — (1) अमुक्त (हाथ में पकड़े), (2) मुक्त (फेंके जाने वाले), (3) मुक्तामुक्त (दोनों प्रकार), (4) यंत्रमुक्त (यंत्र से फेंके)।

#अग्नि पुराण#धनुर्वेद#चार भाग
अस्त्र शस्त्र

वेदों में अस्त्र-शस्त्र का क्या वर्णन है?

वेदों में 18 युद्धकलाओं का मौलिक ज्ञान है। ऋग्वेद में देवताओं के अस्त्र-स्तुति, अथर्ववेद में अस्त्र-प्रयोग मंत्र। धनुर्वेद यजुर्वेद का उपवेद है जिसमें सम्पूर्ण युद्धकला है।

#वेद अस्त्र#18 युद्धकलाएं#धनुर्वेद
अस्त्र शस्त्र

अस्त्र विद्या किससे सीखी जाती थी?

अस्त्र विद्या परशुराम (सर्वश्रेष्ठ गुरु), द्रोणाचार्य, शिव-इंद्र-यम जैसे देवताओं से सीखी जाती थी। गुरु पात्रता देखते थे — शारीरिक बल नहीं, मन-आत्मा की शुद्धि जरूरी थी।

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