दिव्यास्त्रमंत्र से अस्त्र कैसे चलाया जाता थादिव्यास्त्र के लिए देव-संबंधित मंत्र का विधिपूर्वक उच्चारण करते हुए बाण धनुष पर चढ़ाया जाता था। मंत्र से देवता की शक्ति अस्त्र में समाती थी। यह विद्या गोपनीय और गुरु-परंपरा से मिलती थी।#मंत्र अस्त्र#दिव्यास्त्र विधि#धनुर्वेद
दिव्यास्त्रअस्त्र और शस्त्र में क्या अंतर हैशस्त्र = हाथ से पकड़कर या फेंककर चलाए जाने वाले हथियार (तलवार, गदा, त्रिशूल)। अस्त्र = मंत्र-शक्ति या दिव्य-शक्ति से चलाए जाने वाले हथियार (ब्रह्मास्त्र, पाशुपतास्त्र)।#अस्त्र शस्त्र अंतर#धनुर्वेद
अस्त्र शस्त्रअग्नि पुराण में धनुर्वेद के कितने भाग बताए गए हैं?अग्नि पुराण में धनुर्वेद के 4 भाग हैं — (1) अमुक्त (हाथ में पकड़े), (2) मुक्त (फेंके जाने वाले), (3) मुक्तामुक्त (दोनों प्रकार), (4) यंत्रमुक्त (यंत्र से फेंके)।#अग्नि पुराण#धनुर्वेद#चार भाग
अस्त्र शस्त्रवेदों में अस्त्र-शस्त्र का क्या वर्णन है?वेदों में 18 युद्धकलाओं का मौलिक ज्ञान है। ऋग्वेद में देवताओं के अस्त्र-स्तुति, अथर्ववेद में अस्त्र-प्रयोग मंत्र। धनुर्वेद यजुर्वेद का उपवेद है जिसमें सम्पूर्ण युद्धकला है।#वेद अस्त्र#18 युद्धकलाएं#धनुर्वेद
अस्त्र शस्त्रअस्त्र विद्या किससे सीखी जाती थी?अस्त्र विद्या परशुराम (सर्वश्रेष्ठ गुरु), द्रोणाचार्य, शिव-इंद्र-यम जैसे देवताओं से सीखी जाती थी। गुरु पात्रता देखते थे — शारीरिक बल नहीं, मन-आत्मा की शुद्धि जरूरी थी।#अस्त्र विद्या#गुरु परशुराम#द्रोणाचार्य