विस्तृत उत्तर
वेदों में अस्त्र-शस्त्र का वर्णन अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष दोनों रूपों में मिलता है।
धनुर्वेद — वेदों के उपवेदों में धनुर्वेद सम्मिलित है। यह यजुर्वेद का उपवेद माना जाता है और इसमें युद्धकला, अस्त्र-शस्त्र का मौलिक ज्ञान है।
18 युद्धकलाएं — वेदों में 18 युद्धकलाओं (अष्टादश विद्यास्थान) का मौलिक ज्ञान निहित है। इनमें धनुर्विद्या, गदा-युद्ध, खड्ग-युद्ध आदि सम्मिलित हैं। अस्त्र-शस्त्रों का वर्गीकरण और उनकी विशेषताएं वेदों से ही उद्भूत हैं।
ऋग्वेद में — इंद्र के वज्र, मरुतों के अस्त्र, अग्नि के अस्त्र आदि का वर्णन ऋग्वेद में मिलता है। देवताओं के अस्त्र-शस्त्रों की स्तुति के रूप में यह ज्ञान सुरक्षित है।
अथर्ववेद में — विभिन्न प्रकार के अस्त्रों, उनके प्रयोग, शत्रु-नाश और आत्म-रक्षा के मंत्र अथर्ववेद में मिलते हैं। यह वेद व्यावहारिक ज्ञान का भंडार है।
आधुनिक दृष्टि — विक्षनरी और विद्वानों के अनुसार धनुर्वेद-चन्द्रोदय और धनुष-प्रदीप जैसे प्राचीन ग्रंथों में परमाणु शक्ति से शस्त्र-निर्माण का भी उल्लेख है जो वेद परंपरा से आया।





