विस्तृत उत्तर
अस्त्र और शस्त्र — ये दोनों शब्द प्रायः एक साथ प्रयुक्त होते हैं परंतु धनुर्वेद में इनमें स्पष्ट अंतर बताया गया है।
शस्त्र — वे हथियार जो हाथ में पकड़कर प्रयोग किए जाते हैं — जैसे तलवार (खड्ग), त्रिशूल, गदा, परशु, भाला आदि। इन्हें शत्रु पर फेंका या चलाया जाता है परंतु ये हाथ से संचालित होते हैं। त्रिशूल, चंद्रहास, परशु — ये सब शस्त्र हैं।
अस्त्र — वे हथियार जो मंत्रों, तंत्र या यंत्रों की शक्ति से चलाए जाते हैं — जैसे ब्रह्मास्त्र, पाशुपतास्त्र, नारायणास्त्र। इन्हें 'दिव्यास्त्र' या 'मांत्रिक अस्त्र' भी कहते हैं। ये मंत्र-शक्ति से सक्रिय होते हैं और बाण, धनुष या मन से चलाए जाते हैं।
धनुर्वेद में वर्गीकरण — अग्नि पुराण और यजुर्वेद के उपवेद धनुर्वेद में अस्त्र-शस्त्रों के चार प्रमुख भाग बताए गए हैं — अमुक्त (हाथ में पकड़कर), मुक्त (फेंककर), मुक्तामुक्त और मंत्रमुक्त (मंत्र से)।
सरल भेद — शस्त्र = शारीरिक शक्ति से चलाए जाने वाले हथियार; अस्त्र = दिव्य या मंत्र-शक्ति से चलाए जाने वाले हथियार।





