पूजा विधि एवं कर्मकांडनमस्ते और प्रणाम में क्या अंतरनमस्ते (नमः+ते) समान या अनजान व्यक्ति को किया जाने वाला सम्मानपूर्ण अभिवादन है। प्रणाम माता-पिता, गुरु और बड़ों के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण का विशेष नमन है — इसमें भाव और गहराई नमस्ते से अधिक होती है।#नमस्ते#प्रणाम#नमस्कार
मंत्र जप विधिमंत्र जप से पहले भगवान को प्रणाम कैसे करें?साष्टांग (8 अंग भूमि) सर्वोत्तम, दंडवत, शिर नमन, मानसिक। क्रम: प्रणाम→गुरु→विनियोग→न्यास→ध्यान→जप। 'ॐ गुरुभ्यो नमः, ॐ गणेशाय नमः, ॐ [इष्ट]ाय नमः।'#प्रणाम#पहले#जप
सर्प सूक्तसर्प सूक्त में किन सर्पों को नमस्कार किया गया है?सर्प सूक्त में पृथ्वी, अंतरिक्ष, स्वर्गलोक, सूर्य-किरणों, जल, वृक्षों और वटों में रहने वाले समस्त ज्ञात-अज्ञात सर्पों को नमस्कार किया गया है।#सर्प सूक्त#नाग#पृथ्वी आकाश जल
मंदिरमंदिर में सिर झुकाकर प्रणाम क्यों करते हैं?प्रणाम क्यों: भागवत पुराण — मस्तक = अहंकार-केंद्र, झुकाना = अहंकार-विसर्जन। आगम शास्त्र: आज्ञाचक्र देवता-ओर = ऊर्जा-ग्रहण (तिलक यहीं)। मनुस्मृति: 'प्रणामः पापनाशनः।' साष्टांग — 8 अंगों से सर्वोच्च समर्पण। विष्णु स्मृति: चरण-स्पर्श = गहरी श्रद्धा।#मंदिर#प्रणाम#नमस्कार