श्रीमद्भागवतदुखी मन को शांति कैसे मिले?नारदजी के अनुसार दुखी मन को भगवान की कथा, कृष्ण सेवा और भगवान को समर्पित कर्म से वास्तविक शांति मिलती है।#मन की शांति#दुख#कृष्ण सेवा
श्रीमद्भागवतपूजा-पाठ के बाद भी मन शांत क्यों नहीं होता?यदि धर्म के अनुष्ठान से भगवान की लीला-कथा में प्रेम नहीं जागता, तो वह परिश्रम मात्र बताया गया है।#पूजा पाठ#मन की शांति#भगवत कथा
श्रीमद्भागवतभगवान की भक्ति से मन को शांति कैसे मिलती है?निरंतर और निष्काम भक्ति से हृदय परमात्मा को पाता है, अशुभ वासनाएँ मिटती हैं और आत्मप्रसाद मिलता है।#मन की शांति#भक्ति#कृष्ण
श्रीमद्भागवतकलियुग में मन की शांति कैसे मिले?मन की शांति के लिये श्रीमद्भागवत श्रवण, भक्ति और केशव-कीर्तन का मार्ग दिखाया गया है।#मन की शांति#कलियुग#श्रीमद्भागवत
मंदिर पूजामंदिर में पूजा के दौरान मन को शांत कैसे रखें?मन शांत रखने के उपाय: स्नान व शुद्ध वस्त्र, भगवान पर दृष्टि स्थिर (त्राटक), धीमी श्वास, मानसी सेवा का भाव, और नाम-जप का आश्रय। गीता (6.19): स्थिर दीपक की तरह मन। जप मन को लंगर की तरह थामता है।#मन की शांति#एकाग्रता#ध्यान
शिव पूजाशिव पूजा के दौरान मन को शांत कैसे रखें?पूजा में मन शांत: गीता (9.26): शुद्ध भाव से अर्पण = भगवान स्वीकार करते हैं। उपाय: पूर्व में 5 गहरी साँसें। 'ॐ नमः शिवाय' का लयबद्ध जप। शिव के रूप-गुण का स्मरण (नारद भक्ति सूत्र 54)। धूप-सुगंध। घंटी = नाद-ब्रह्म। धीमे भजन। शिव पुराण: भावपूजा > बाह्य पूजा।#शिव पूजा#मन की शांति#एकाग्रता