ज्योतिषमंत्र जप से कालसर्प दोष का निवारण कैसे करें?मंत्र: महामृत्युंजय सवा लाख+हवन (सर्वाधिक प्रभावी)। 'ॐ नमः शिवाय'। राहु: 'ॐ रां राहवे नमः' 18,000। केतु: 'ॐ कें केतवे नमः' 17,000। विष्णु सहस्रनाम। अन्य: त्र्यम्बकेश्वर/महाकाल पूजा, रुद्राभिषेक, नाग पंचमी। ज्योतिषी से कुण्डली परामर्श।#कालसर्प#राहु केतु#मंत्र
लोकराहु केतु कैसे बने?स्वर्भानु का सिर राहु और धड़ केतु बना, क्योंकि अमृत पीने के बाद विष्णु ने उसे काट दिया।#राहु केतु#स्वर्भानु#सुदर्शन चक्र
फलश्रुतिमहामृत्युंजय अनुष्ठान से कालसर्प और नवग्रह दोष कैसे दूर होते हैं?कालसर्प दोष, शनि की साढ़ेसाती और राहु-केतु के क्रूर प्रभावों को शांत करने के लिए महामृत्युंजय अनुष्ठान को सर्वोत्कृष्ट वैदिक उपचार माना गया है।#कालसर्प दोष#शनि साढ़ेसाती#राहु केतु
अष्टधातुअष्टधातु से ग्रह शांति कैसे होती है?अष्टधातु की मूर्ति पूजा या अष्टधातु का कड़ा/अंगूठी धारण करने से सभी नौ ग्रहों के दुष्प्रभाव शांत होते हैं — विशेष रूप से राहु-केतु जैसे छाया ग्रहों के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।#ग्रह शांति#राहु केतु#अशुभ प्रभाव
विशेष अभिषेक द्रव्य और उनके फलतिल के तेल से अभिषेक करने से क्या होता है?तिल के तेल से अभिषेक करने पर ज्ञान वृद्धि और शनि, राहु, केतु के दोषों की शांति होती है — यह ग्रह दोष निवारण का विशेष द्रव्य है।#तिल तेल अभिषेक#शनि दोष#राहु केतु
भय-निवारण और रक्षाकालसर्प दोष से अज्ञात भय क्यों होता है?कालसर्प दोष में राहु (अतृप्त इच्छाएं) और केतु (कर्म-बंधन) के बीच जीवन पिसता रहता है जिससे अज्ञात भय, मानसिक अशांति और दुःस्वप्न (सांप दिखना) की समस्या होती है।#अज्ञात भय#कालसर्प दोष#मानसिक अशांति
सर्प सूक्तसर्प सूक्त का पाठ क्यों करना चाहिए?सर्प सूक्त का पाठ इसलिए करना चाहिए क्योंकि यह समस्त सर्प-शक्तियों को शांत करता है और राहु-केतु के लौकिक-अलौकिक दोनों प्रकार के नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है।#सर्प सूक्त पाठ#राहु केतु#नकारात्मक प्रभाव
कालसर्प दोष: परिचय और कारणकालसर्प दोष में सभी ग्रह कहाँ फँस जाते हैं?कालसर्प दोष में जन्म-कुंडली के सभी सात ग्रह राहु (सर्प का मुख) और केतु (सर्प की पूंछ) के मध्य एक ओर फँस जाते हैं।#कालसर्प दोष#ग्रह#राहु केतु
कालसर्प दोष: परिचय और कारणराहु और केतु कालसर्प दोष में क्या भूमिका निभाते हैं?राहु (सर्प का मुख) और केतु (सर्प की पूंछ) कर्म-फल के दण्ड-अधिकारी हैं — इनके मध्य सभी ग्रहों के फँसने से कालसर्प दोष बनता है।#राहु केतु#कालसर्प दोष#छाया ग्रह
कालसर्प दोष: परिचय और कारणकालसर्प योग क्या होता है?कालसर्प योग वह ग्रह-स्थिति है जब जन्म-कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य एक ओर फँस जाते हैं — यह नाग-पाश (सर्प-बंधन) कहलाता है और जीवन में बाधा, संघर्ष और मानसिक अस्थिरता देता है।#कालसर्प योग#राहु केतु#जन्म कुंडली
शिव पूजाशिव की पूजा में राहु केतु दोष निवारण कैसे करें?राहु: महामृत्युंजय सवा लाख जप+हवन, शिवलिंग पर काले तिल, काल भैरव पूजा। केतु: कुश से जलाभिषेक, गणेश पूजा, सप्तधान्य अर्पण। दोनों: रुद्राभिषेक, प्रदोष व्रत, 8/9 मुखी रुद्राक्ष, काल सर्प दोष हेतु त्र्यम्बकेश्वर/महाकाल पूजा। ज्योतिषी से कुंडली परामर्श उचित।#राहु केतु#ग्रह दोष#निवारण