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क्या है

पंचांग क्या है?(57)

पंचांग का अर्थपंचांग क्या है?पंचांग का महत्व
सरल उत्तर

अतिगण्ड 27 नित्ययोगों में षष्ठ, 9 अशुभ योगों में से एक। 'अत्यधिक बाधा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 66°40'–80°। स्वामी चंद्रमा। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में साहसी, धर्मप्रेमी, किंतु दुर्घटना-सावधान।

स्रोत प्रश्न: अतिगण्ड योग क्या होता है? →
पंचांग एवं ज्योतिष

अतिगण्ड योग क्या होता है?

अतिगण्ड 27 नित्ययोगों में षष्ठ, 9 अशुभ योगों में से एक। 'अत्यधिक बाधा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 66°40'–80°। स्वामी चंद्रमा। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में साहसी, धर्मप्रेमी, किंतु दुर्घटना-सावधान।

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पंचांग एवं ज्योतिष

शोभन योग क्या होता है?

शोभन 27 नित्ययोगों में पंचम, शुभ योग। 'सुंदर-शोभायमान' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 53°20'–66°40'। स्वामी बृहस्पति। यात्रा के लिए सर्वोत्तम। जन्म में आकर्षक, चतुर, कलाप्रेमी।

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सौभाग्य योग क्या होता है?

सौभाग्य 27 नित्ययोगों में चतुर्थ, शुभ योग। 'उत्तम भाग्य' का द्योतक। सूर्य-चंद्र योगफल 40°–53°20'। स्वामी ब्रह्मा। सभी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ। जन्म में भाग्यशाली, परोपकारी, समाज में मान्य।

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आयुष्मान योग क्या होता है?

आयुष्मान 27 नित्ययोगों में तृतीय, शुभ योग। 'दीर्घायु' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 26°40'–40°। स्वामी रुद्र/शिव। स्वास्थ्य कार्य और विवाह के लिए उत्तम। जन्म में दीर्घायु, स्वस्थ, ऊर्जावान।

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प्रीति योग क्या होता है?

प्रीति 27 नित्ययोगों में द्वितीय, अत्यंत शुभ योग। 'प्रेम और मित्रता' का प्रतीक। सूर्य-चंद्र योगफल 13°20'–26°40'। स्वामी भगवान विष्णु। विवाह-व्यापार-यात्रा शुभ। जन्म में मिलनसार, वाणी-मधुर, समृद्ध।

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विष्कुम्भ योग क्या होता है?

विष्कुम्भ 27 नित्ययोगों में प्रथम और 9 अशुभ योगों में एक है। 'विष + कुम्भ' = जहर का घड़ा। सूर्य-चंद्र योगफल 0°–13°20' पर होता है। स्वामी यक्ष। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में प्रभावशाली किंतु शत्रु-पीड़ित।

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पुरश्चरण

पुरश्चरण के पांच अंग क्या हैं?

पुरश्चरण के पाँच अंग (मंत्रमहार्णव): जप (मूल — अक्षर × लाख), हवन (जप का 10वाँ — अग्नि में आहुति), तर्पण (हवन का 10वाँ — देव-ऋषि-पितर को जल), मार्जन (तर्पण का 10वाँ — जल-छिड़काव), ब्राह्मण अर्चन (मार्जन का 10वाँ — भोजन-दक्षिणा)। अनुपात: 10 लाख → 1 लाख → 10000 → 1000 → 100।

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