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क्या है

शिव पूजा क्या है?(9)

शिव पूजा का अर्थशिव पूजा क्या है?शिव पूजा का महत्व
सरल उत्तर

भस्म-रुद्राक्ष धारण कर संकल्प लें। शिव का अभिषेक करें। बेलपत्र पर चंदन लगाकर 'बिल्वाष्टकम्' के श्लोक पढ़ते हुए उसे शिवलिंग पर चढ़ाएं और अंत में कपूर से आरती करें।

स्रोत प्रश्न: बेलपत्र से शिव पूजा करने की सही विधि क्या है? →
पूजा घर वास्तु

पूजा घर में पारद शिवलिंग रखने के नियम क्या हैं?

पारद शिवलिंग सफेद कपड़े पर रखें, नियमित पूजा अनिवार्य, सोने से स्पर्श न कराएँ, रुद्राक्ष साथ रखें, मांस-मदिरा वर्जित। जलधारी उत्तर की ओर, बेलपत्र चढ़ाएँ। तुलसी-हल्दी-सिंदूर वर्जित।

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पूजा विधि

बेलपत्र से शिव पूजा करने की सही विधि क्या है?

भस्म-रुद्राक्ष धारण कर संकल्प लें। शिव का अभिषेक करें। बेलपत्र पर चंदन लगाकर 'बिल्वाष्टकम्' के श्लोक पढ़ते हुए उसे शिवलिंग पर चढ़ाएं और अंत में कपूर से आरती करें।

#शिव पूजा#संकल्प#अभिषेक
परिचय

बिल्वपत्र (बेलपत्र) क्या है और शिव पूजा में इसका क्या महत्व है?

बेलपत्र साक्षात् शिव का स्वरूप और उनकी कृपा पाने का सबसे तेज़ माध्यम है। शिव पूजा में इसका महत्व अभिषेक और अन्य सभी सामग्रियों से भी ज्यादा माना गया है।

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शिव पूजा

शिव पूजा का सही समय क्या है?

शिव पूजा समय: निशीथ काल (अर्धरात्रि) — सर्वोत्तम (शिव रात्रि-देवता)। प्रदोष (त्रयोदशी सूर्यास्त बाद) — स्कंद पुराण। ब्रह्म मुहूर्त — नित्य पूजा। महाशिवरात्रि: 4 प्रहर, तृतीय प्रहर (12-3 बजे) सर्वश्रेष्ठ। वर्जित: राहु काल, गुलिक काल।

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पूजा विधि

शिव पूजा की सही विधि क्या है?

शिव पूजा में: स्नान, बेलपत्र, पंचामृत अभिषेक (दूध-दही-घी-शहद-शक्कर), गंगाजल, भस्म त्रिपुंड, धतूरा-आक पुष्प, 'ॐ नमः शिवाय' जप, आरती और आधी परिक्रमा। बेलपत्र और जल — ये दो सबसे महत्वपूर्ण अर्पण हैं।

#शिव पूजा#विधि#षोडशोपचार
पूजा घर वास्तु

पूजा घर में पारद शिवलिंग रखने के नियम क्या हैं?

पारद शिवलिंग सफेद कपड़े पर रखें, नियमित पूजा अनिवार्य, सोने से स्पर्श न कराएँ, रुद्राक्ष साथ रखें, मांस-मदिरा वर्जित। जलधारी उत्तर की ओर, बेलपत्र चढ़ाएँ। तुलसी-हल्दी-सिंदूर वर्जित।

#पारद शिवलिंग#शिव पूजा#पारद
अभिषेक विधि

रुद्राभिषेक करने की सही विधि क्या है?

रुद्राभिषेक में श्री रुद्रम् पाठ के साथ शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), गंगाजल, नारियल जल से क्रमशः अभिषेक किया जाता है। इसके बाद बेलपत्र, चंदन, विभूति अर्पण और आरती की जाती है।

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पूजा विधि

शिव पूजा की सही विधि क्या है?

शिव पूजा में स्नान के बाद षोडशोपचार विधि से पूजन किया जाता है — पंचामृत अभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, चंदन अर्पण, 'ॐ नमः शिवाय' जप और आरती। तुलसी व केतकी वर्जित हैं।

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शिव पर्व

प्रदोष काल में शिव पूजा की विशेष विधि क्या है?

प्रदोष काल = सूर्यास्त के आसपास 2.5 घंटे — शिव तांडव करते हैं (स्कन्द पुराण)। त्रयोदशी का प्रदोष विशेष। विधि: जलाभिषेक → पंचामृत → बेलपत्र → 108 जप → स्तोत्र पाठ → कर्पूर आरती। व्रत सूर्योदय-सूर्यास्त, प्रदोष पूजा के बाद खोलें।

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