शिव अस्त्र-शस्त्रशिव का पाशुपतास्त्र क्या हैपाशुपतास्त्र शिव का सर्वशक्तिशाली दिव्यास्त्र है — मन, नेत्र, वाणी या धनुष किसी से भी चलाया जा सकता है। सम्पूर्ण सृष्टि का विनाश कर सकता है। महाभारत में शिव ने यह अर्जुन को दिया था।#पाशुपतास्त्र#महाविनाशक#दिव्यास्त्र
भगवद गीतागीता के तीसरे अध्याय कर्मयोग का सारांश क्या हैतीसरा अध्याय निष्काम कर्म का उपदेश देता है। कर्म अनिवार्य है; फल की आसक्ति छोड़कर यज्ञ भावना से करें। लोकसंग्रह के लिए ज्ञानी को भी कर्म जरूरी। काम ही सबसे बड़ा शत्रु।#गीता#कर्मयोग#तीसरा अध्याय
श्रीमद्भागवतभीष्म स्तुति में गीता का प्रसंग क्या है?भीष्म स्तुति में गीता का प्रसंग अर्जुन का मोह दूर करने और कृष्ण के पार्थसारथी रूप को दिखाने के लिए आता है।#भीष्म स्तुति#गीता#अर्जुन
श्रीमद्भागवतअर्जुन और अश्वत्थामा की ब्रह्मास्त्र कथा क्या है?अश्वत्थामा ने भय में ब्रह्मास्त्र चलाया; कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने ब्रह्मास्त्र से उसका निवारण किया और फिर अश्वत्थामा को बाँध लिया।#अर्जुन#अश्वत्थामा#ब्रह्मास्त्र
लोकरसातल लोक में निवातकवच कौन हैं?निवातकवच रसातल के शक्तिशाली असुर हैं जिनका कवच वायु से भी अभेद्य था और जो हिरण्यपुर में रहते थे।#निवातकवच#रसातल#हिरण्यपुर
भक्ति एवं आध्यात्मसख्य भक्ति क्या है?सख्य भक्ति में भगवान को अपना परम मित्र मानकर उनसे बिना किसी भय या औपचारिकता के सहज संवाद किया जाता है। अर्जुन-कृष्ण और सुदामा-कृष्ण का संबंध इसका आदर्श उदाहरण है। इसमें भगवान पर वही पूर्ण विश्वास और खुलापन होता है जो एक सच्चे मित्र पर होता है।#सख्य भक्ति#मित्र भाव#अर्जुन