श्रीमद्भागवततपस्या और दान का असली फल क्या है?तपस्या और दान का असली फल श्रीकृष्ण के गुण और लीला का वर्णन करना बताया गया है।#तपस्या#दान#कृष्ण गुण
लोकअपरोक्ष ज्ञान क्या होता है?जब सत्य भीतर प्रत्यक्ष अनुभव बन जाए, वह अपरोक्ष ज्ञान है।#अपरोक्ष ज्ञान#अनुभूति#तपस्या
लोकफेनप ऋषि कौन हैं?फेनप ऋषि वे तपस्वी हैं जो क्षीर सागर के चारों ओर रहते हैं और केवल दूध के झाग पर जीवित रहते हैं।#फेनप ऋषि#क्षीर सागर#रसातल
लोकतपोलोक का अर्थ क्या होता है?तपोलोक का अर्थ है तपस्या का लोक या तपस्वियों का संसार।#तपोलोक#अर्थ#तपस्या
लोकतपोलोक क्या है?तपोलोक तपस्या का दिव्य लोक है, जहाँ शुद्ध चित्त तपस्वी, सिद्ध योगी और वैराज देवगण निवास करते हैं।#तपोलोक#चौदह लोक#ऊर्ध्व लोक
व्रत-पूर्व तैयारीरुद्राक्ष का महत्व और उत्पत्ति क्या है?रुद्राक्ष = शिव के हजारों वर्षों की तपस्या के बाद नेत्र खोलने पर गिरे अश्रुओं से उत्पन्न। मंत्रों के सूक्ष्म स्पंदन अवशोषित कर चेतना ऊर्ध्वगामी बनाता है। एकमुखी = परब्रह्म; पंचमुखी = पाप नाश; चतुर्दशमुखी = परम शिव स्वरूप।#रुद्राक्ष उत्पत्ति#शिव अश्रु#तपस्या
शास्त्र ज्ञानउपनिषद में तपस्या का महत्व क्या है?तैत्तिरीय उपनिषद (3/1) में 'तपो ब्रह्म' — तप ही ब्रह्म है। भृगु ने बार-बार तप करके आनंदमय ब्रह्म को जाना। छान्दोग्य (8/5/1) — 'ब्रह्मचर्यमेव तपः' — ब्रह्मचर्य ही सबसे श्रेष्ठ तप है। कठोपनिषद (2/24) — आत्मा बलहीन को नहीं मिलती — यह बल तपस्या का है।#तपस्या#उपनिषद#तप
वेद ज्ञानवेदों में तपस्या का महत्व क्या है?वेदों में तपस्या को सृष्टि का आदि-कारण माना गया है (ऋग्वेद 10/129)। अथर्ववेद (11/5/1) में ब्रह्मचर्य-तप से देवताओं ने मृत्यु पर विजय पाई। तैत्तिरीय उपनिषद (3/1) — 'तपो ब्रह्म' — तप ही ब्रह्म है।#तपस्या#वेद#तप
साधना विज्ञानतपस्या क्या है?तपस्या (तप) का अर्थ है शरीर, मन और वाणी पर कठोर अनुशासन लगाकर आत्मशुद्धि करना। गीता में तीन प्रकार के तप बताए गए हैं — शारीरिक, वाचिक और मानसिक। यह अष्टांग योग के नियमों में से एक है।#तपस्या#तप#नियम