विस्तृत उत्तर
तपोलोक चौदह लोकों में सात ऊर्ध्व लोकों के क्रम में आने वाला एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण, दिव्य और परम पवित्र लोक है। सात ऊर्ध्व लोकों के क्रम में भूर्लोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक आते हैं। इस शृंखला में तपोलोक नीचे से छठा और ऊपर से दूसरा लोक है। तपोलोक का शाब्दिक और पारिभाषिक अर्थ है 'तपस्या का लोक' या 'तपस्वियों का संसार'। यह वह परम पावन आध्यात्मिक क्षेत्र है जहाँ शुद्ध चित्त वाले, ऊर्ध्वरेता, सिद्ध तपस्वी और 'वैराज' नामक अयोनिज देवगण निवास करते हैं। यह लोक भौतिक प्रपंचों, क्लेशों और त्रिगुणमयी माया के बंधनों से पूर्णतः मुक्त एक विशुद्ध सात्त्विक और चिन्मय लोक है, जहाँ जन्म-मरण के लौकिक नियम लागू नहीं होते।
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