लोकसपिण्डीकरण क्या है?सपिण्डीकरण वह संस्कार है जिसमें प्रेत का पिण्ड पितरों के पिण्डों से मिलाकर उसे पितृलोक में स्थान दिया जाता है।#सपिण्डीकरण#श्राद्ध#प्रेत
मरणोपरांत आत्मा यात्राएकादशाह क्या होता है?एकादशाह ग्यारहवें दिन का कृत्य है, जब पिण्डज शरीर पूर्ण होने के बाद प्रेत को अन्न, जल और दीपदान दिया जाता है।#एकादशाह#ग्यारहवाँ दिन#प्रेत
मरणोपरांत आत्मा यात्राअशौच या सूतक क्या होता है?मृत्यु से सपिण्डीकरण तक घर और परिजनों में रहने वाली अशुद्धि को अशौच या सूतक कहा जाता है।#अशौच#सूतक#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रापिण्डज शरीर क्या होता है?पिण्डज शरीर पिण्डदान से दस दिनों में बनने वाला प्रेत का पारलौकिक शरीर है।#पिण्डज शरीर#पिण्डदान#दशगात्र
जीवन एवं मृत्युप्रेत को जल न मिलने पर क्या होता है?प्रेत को जल न मिलने पर — यममार्ग पर तृष्णा की असहनीय पीड़ा, मूर्च्छा, वैतरणी में रक्त-मवाद पीने को बाध्य। 'वहाँ कहीं जल नहीं दिखता' — गरुड़ पुराण का यही वर्णन है। तर्पण से यह पीड़ा कम होती है।#प्रेत#जल#प्यास
जीवन एवं मृत्युप्रेत को भोजन न मिलने पर क्या होता है?प्रेत को भोजन न मिलने पर — असहनीय भूख की पीड़ा, यात्रा में असमर्थता, वैतरणी में रक्त-पान को विवश और यात्रा न कर पाने से दीर्घ भटकन। गरुड़ पुराण में यही दुर्दशा बताई गई है।#प्रेत#भोजन#भूख
जीवन एवं मृत्युप्रेत शब्द का अर्थ क्या है?'प्रेत' = 'प्र + इत' = 'आगे गया हुआ।' यह मृत व्यक्ति की आत्मा का नाम है। गरुड़ पुराण में वह आत्मा जो मृत्यु के बाद श्राद्ध-संस्कार की प्रतीक्षा में है — वह प्रेत कहलाती है।#प्रेत#अर्थ#व्युत्पत्ति