श्रीमद्भागवतभागवत पुराण का मुख्य उद्देश्य क्या है?इसका उद्देश्य परम सत्य का ध्यान, निष्कपट धर्म, तीन तापों का नाश और जीवों का कल्याण बताया गया है।#भागवत पुराण#उद्देश्य#कल्याण
श्रीमद्भागवतश्रीमद्भागवत महापुराण क्या है?यह व्यासदेव रचित महापुराण है, जिसमें परम सत्य, निष्कपट परम धर्म, परमात्मा और भगवत रस का वर्णन है।#श्रीमद्भागवत#भागवत पुराण#परम धर्म
भक्ति एवं आध्यात्मनवधा भक्ति के नौ प्रकार क्या हैं?नवधा भक्ति के नौ प्रकार हैं — श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पाद-सेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन। भागवत पुराण (7.5.23-25) में प्रह्लाद ने और रामचरितमानस में श्रीराम ने शबरी को इनका उपदेश दिया। इनमें से किसी एक को भी सच्चे भाव से अपनाने से मोक्ष संभव है।#नवधा भक्ति#भागवत पुराण#प्रह्लाद
हिंदू दर्शनभागवत पुराण का मुख्य संदेश क्या हैभागवत पुराण का मुख्य संदेश: अनन्य भक्ति = मोक्ष का सरलतम मार्ग। नवधा भक्ति (7.5.23), कृष्ण लीला (10वां स्कंध), प्रह्लाद की भक्ति शक्ति, अजामिल की नाम-मुक्ति। सार: किसी भी समय, किसी भी स्थिति में भगवन्नाम = मुक्ति। 12 स्कंध, 18,000 श्लोक।#भागवत पुराण#कृष्ण#भक्ति
विष्णु उपासनाविष्णु जी के 24 अवतारों के नाम क्या हैं?भागवत पुराण में भगवान विष्णु के 24 अवतारों में प्रमुख हैं — सनकादि ऋषि, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, मत्स्य, कूर्म, वाराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि (अभी आना है)। इनमें से 10 दशावतार सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं।#विष्णु अवतार#चौबीस अवतार#दशावतार
विष्णु उपासनानारायण कवच क्या है और इसे कैसे पढ़ें?नारायण कवच भागवत पुराण (स्कन्ध 6, अध्याय 8) में वर्णित विष्णु जी का रक्षा-मंत्र है, जो सर्वप्रथम इन्द्र को दिया गया था। स्नान करके, शुद्ध आसन पर बैठकर, 'ॐ नमो नारायणाय' से न्यास सहित पाठ करें। गुरुवार, एकादशी या संकट काल में इसका पाठ विशेष फलदायी है।#नारायण कवच#भागवत पुराण#सुरक्षा कवच