विष्णु भक्तिनारायण कवच का पाठ करने की विधि क्या है?श्रीमद्भागवत (स्कंध 6, अध्याय 8): विश्वरूप→इंद्र। विष्णु के विभिन्न रूपों से प्रत्येक अंग/दिशा रक्षा। प्रातः, शुद्ध उच्चारण, एकादशी/गुरुवार। इंद्र ने इससे दैत्य जीते। बिना दीक्षा सभी पढ़ सकते।#नारायण कवच#श्रीमद्भागवत#सुरक्षा
श्रीमद्भागवतश्रीमद्भागवत महापुराण क्या है?यह व्यासदेव रचित महापुराण है, जिसमें परम सत्य, निष्कपट परम धर्म, परमात्मा और भगवत रस का वर्णन है।#श्रीमद्भागवत#भागवत पुराण#परम धर्म
श्रीमद्भागवतकलियुग में मोक्ष का सबसे आसान उपाय क्या है?कलियुग के लिये श्रीमद्भागवत का श्रवण और केशव-कीर्तन मोक्षदायक साधन बताए गए हैं।#कलियुग#मोक्ष#हरि कीर्तन
लोकहंस अवतार कौन थेहंस अवतार भगवान विष्णु का ज्ञानमय रूप है, जिसने सनकादिक मुनियों को आत्मज्ञान दिया।#हंस अवतार#भगवान विष्णु#हंस गीता
लोकराजा अम्बरीष कौन थेराजा अम्बरीष भगवान विष्णु के परम भक्त और महान चक्रवर्ती राजा थे।#राजा अम्बरीष#श्रीमद्भागवत#विष्णु भक्त
स्वाहास्वाहा देवी कौन हैं — उनकी उत्पत्ति कैसे हुई?श्रीमद्भागवत और शिव पुराण: आहुतियाँ देवताओं तक न पहुँचने से देवता क्षुधा-पीड़ित → ब्रह्मा जी के अनुनय पर मूल-प्रकृति के अंश से स्वाहा देवी प्रकट हुईं। स्वाहा = प्रजापति दक्ष की पुत्री, अग्निदेव की पत्नी। श्रीकृष्ण का वरदान: अग्नि की दाहिका शक्ति के रूप में देवताओं का पोषण।#स्वाहा देवी#दक्ष पुत्री#अग्निदेव पत्नी
भक्ति एवं आध्यात्मनाम संकीर्तन का आध्यात्मिक लाभ क्या हैनाम-संकीर्तन के लाभ — चित्त-शुद्धि, पाप-नाश, भक्ति-उदय और मोक्ष। भागवत 12.3.52 के अनुसार यह कलियुग में सतयुग के तप, त्रेता के यज्ञ और द्वापर की पूजा का फल देता है। देश-काल का कोई बंधन नहीं।#नाम संकीर्तन#आध्यात्मिक लाभ#कलियुग