शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ भर्गाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपभर्ग स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पापों को भस्म करने वाले (भर्ग) देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संचित कुकर्मों (Past bad karmas) का भस्म होना
विस्तृत लाभ
संचित कुकर्मों (Past bad karmas) का भस्म होना।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये एकादशरुद्राः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ गोधनेश्वर्यै नमः
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥
ॐ सर्वैश्वर्यप्रदायै नमः