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धर्म ज्ञान📜 बृहदारण्यक उपनिषद (3.9.1), शतपथ ब्राह्मण, ऋग्वेद2 मिनट पठन

33 करोड़ देवी देवता हैं या 33 कोटि — अर्थ क्या?

संक्षिप्त उत्तर

33 करोड़ नहीं, 33 कोटि (प्रकार) देवता हैं। बृहदारण्यक उपनिषद (3.9.1): 8 वसु + 11 रुद्र + 12 आदित्य + इंद्र + प्रजापति = 33। 'कोटि' = प्रकार/श्रेणी, करोड़ नहीं। यह सबसे प्रचलित भ्रांति है।

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विस्तृत उत्तर

यह हिंदू धर्म की सबसे प्रचलित भ्रांतियों में से एक है। सही उत्तर: 33 कोटि (प्रकार) देवता हैं, 33 करोड़ नहीं।

शास्त्रीय प्रमाण

बृहदारण्यक उपनिषद (3.9.1) में याज्ञवल्क्य-शाकल्य संवाद:

शाकल्य ने पूछा: 'कितने देवता हैं?'

याज्ञवल्क्य ने उत्तर दिया: 'त्रयस्त्रिंशत्' = 33 देवता

फिर विस्तार से बताया:

  • 8 वसु — पृथ्वी, अग्नि, वायु, अंतरिक्ष, आदित्य, द्यौ, चंद्रमा, नक्षत्र
  • 11 रुद्र — दस प्राण + आत्मा
  • 12 आदित्य — वर्ष के 12 मास
  • 1 इंद्र + 1 प्रजापति = कुल 33

भ्रांति कैसे हुई

  • संस्कृत में 'कोटि' शब्द के दो अर्थ हैं:
  1. 1करोड़ (संख्या)
  2. 2प्रकार/श्रेणी (Category)
  • '33 कोटि देवता' का सही अर्थ = 33 प्रकार/श्रेणी के देवता, न कि 33 करोड़।

शतपथ ब्राह्मण में भी 33 देवताओं का ही उल्लेख है।

ऋग्वेद (1.34.11): *'त्रयस्त्रिंशद् देवाः'* — 33 देवता।

सारांश: वैदिक साहित्य में स्पष्ट रूप से 33 देवता (8 वसु + 11 रुद्र + 12 आदित्य + इंद्र + प्रजापति) बताए गए हैं। '33 करोड़' एक गलत अनुवाद है जो 'कोटि' शब्द की दोहरी अर्थवत्ता के कारण प्रचलित हो गया।

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शास्त्रीय स्रोत
बृहदारण्यक उपनिषद (3.9.1), शतपथ ब्राह्मण, ऋग्वेद
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