विस्तृत उत्तर
८४-अंश सिद्धान्त श्राद्ध-कर्म में तीन पीढ़ियों को मुख्य पिण्ड दिए जाने का जैविक और आनुवंशिक आधार है। शास्त्रों के अनुसार जिस शुक्राणु और रक्त के संयोग से जीव माता के गर्भ में स्थूल शरीर धारण करता है, उसमें जीवन-ऊर्जा, गुणसूत्र या रक्त के कुल ८४ अंश होते हैं। इनमें २८ अंश व्यक्ति के अपने जीवनकाल के भोजन, तप और कर्मों से उपार्जित होते हैं, जबकि ५६ अंश पूर्वजों से आनुवंशिक परम्परा के रूप में प्राप्त होते हैं। इन ५६ अंशों में पिता से २१, पितामह से १५, प्रपितामह से १०, चतुर्थ पीढ़ी से ६, पञ्चम पीढ़ी से ३ और षष्ठ पीढ़ी से १ अंश मिलता है।
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