विस्तृत उत्तर
अर्जुन ने हिरण्यपुर का विनाश निवातकवचों और कालेयों के संहार के बाद किया। हिरण्यपुर रसातल के जल के भीतर स्थित एक स्वर्णमयी, अजेय और मायावी नगरी थी। अर्जुन इंद्र के आदेश पर मातलि के रथ से वहाँ पहुँचे। निवातकवचों ने तीक्ष्ण बाणों, लौह अस्त्रों, गदाओं, त्रिशूलों, पाषाणों और मायावी अंधकार से अर्जुन पर आक्रमण किया। अर्जुन ने अपने दिव्यास्त्रों से उनकी पूरी माया नष्ट कर दी। अंततः इंद्र से प्राप्त वज्रास्त्र और ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उन्होंने तीन करोड़ निवातकवचों और कालेयों का नाश किया और हिरण्यपुर की मायावी नगरी को पूर्णतः ध्वस्त कर दिया।
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