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विस्तृत उत्तर
ध्रुवलोक को समस्त ज्योतिश्चक्र की नाभि के रूप में बताया गया है। शास्त्रीय गणना के अनुसार शनि मण्डल से एक लाख योजन की दूरी पर सप्तर्षिमण्डल है और सप्तर्षियों से एक लाख योजन ऊपर ध्रुवमण्डल, यानी ध्रुवलोक, स्थित है। ध्रुवलोक को ऊर्ध्व लोकों का एक प्रमुख आधार बिंदु माना जाता है। यह सूर्य से कुल अड़तीस लाख योजन ऊपर स्थित बताया गया है। ध्रुवलोक से आगे की यात्रा पूर्णतः सिद्ध और दिव्य लोकों की यात्रा मानी गई है।
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