विस्तृत उत्तर
कौषीतकि ब्राह्मण उपनिषद के प्रथम अध्याय में इल्या (Ilya) नामक एक दिव्य वृक्ष का वर्णन है। यह वृक्ष सत्यलोक में विजरा नदी के पार स्थित है। जब कोई जीव विजरा नदी पार करके सत्यलोक में प्रवेश करता है तो सर्वप्रथम उसे इल्या वृक्ष के दर्शन होते हैं जिसकी सुगन्ध से जीव सुवासित हो जाता है। यह दिव्य सुगंध जीव की आत्मा को और अधिक शुद्ध और परम आनंद से भर देती है। इसके पश्चात ही जीव आगे सलज्ज नगर, अपराजिता भवन और विभु प्रांगण तक पहुँचता है जहाँ इन्द्र और प्रजापति द्वारपाल के रूप में उपस्थित रहते हैं।
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