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विस्तृत उत्तर
जैन धर्म में अनंत चतुर्दशी 'दशलक्षण पर्व' के अंत में आती है और अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यह दिन 14वें तीर्थंकर भगवान 'अनन्तनाथ' को समर्पित है। जैन मतावलंबी इस दिन उपवास रखते हैं, अष्टद्रव्य पूजा करते हैं और 'अनन्त यंत्र' का निर्माण करते हैं। यह 14 के अंक (14 गुणस्थानों) से जुड़ा आध्यात्मिक उन्नति का दिन है।
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