उद्यापन और दानशनिवार को क्या दान करना चाहिए और 'छाया दान' क्या है?शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल, लोहा, काला कपड़ा और उड़द की दाल दान करनी चाहिए। कांसे की कटोरी में तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखकर दान करने को 'छाया दान' कहते हैं, जिससे रोग दूर होते हैं।#दान#छाया दान#काले तिल
उद्यापन और दानशनिवार व्रत में क्या दान करें?शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल, लोहे का तवा या बर्तन, काले कपड़े, साबुत उड़द, छाता और काले जूते दान करना बहुत शुभ माना जाता है।#दान सामग्री#काला तिल#सरसों का तेल
उद्यापन और दानशनिवार व्रत का उद्यापन कैसे करें?अंतिम शनिवार को हवन किया जाता है। 'ॐ शं शनैश्चराय स्वाहा' बोलकर तिल और जौ की 108 आहुतियां दी जाती हैं और ब्राह्मणों को उड़द की दाल का भोजन कराया जाता है।#उद्यापन विधि#हवन#शमी की लकड़ी
उद्यापन और दानगुरुवार व्रत में क्या दान करें?गुरुवार व्रत के उद्यापन में ब्राह्मण को सवा किलो चने की दाल, सवा मीटर पीला कपड़ा, केले (12 या इच्छानुसार), हल्दी, गुड़, मुनक्का और दक्षिणा का दान करना चाहिए।#दान सामग्री#चने की दाल#पीला कपड़ा
उद्यापन और दानगुरुवार व्रत का उद्यापन कैसे करें?16 व्रत पूरे होने पर 17वें गुरुवार को हवन किया जाता है। हवन में 'ॐ गुरवे नमः स्वाहा' और 'ॐ विष्णवे नमः स्वाहा' बोलकर चने की दाल, गुड़ और घी से 108 आहुतियां दें।#उद्यापन विधि#हवन#108 आहुति
उद्यापन और दानबुधवार व्रत में क्या दान करें?व्रत के उद्यापन में हरे वस्त्र, कांसे का बर्तन, साबुत मूंग की दाल, फल, हरी चूड़ियां और 21 मोदक दान करने चाहिए। साथ ही ब्राह्मणों को बिना नमक का सात्विक भोजन कराना चाहिए।#दान सामग्री#हरी वस्तुएं#ब्राह्मण भोजन
उद्यापन और दानबुधवार व्रत का उद्यापन कैसे करें?21 व्रत पूरे होने पर 22वें बुधवार को हवन किया जाता है। हवन में तिल, जौ, घी और मेवे से 'ॐ गं गणपतये स्वाहा' और 'ॐ बुं बुधाय स्वाहा' बोलकर 108 आहुतियां दी जाती हैं।#उद्यापन विधि#हवन#21 बुधवार
उद्यापन और दानसोलह सोमवार का व्रत पूरा होने पर उद्यापन कैसे करते हैं?17वें सोमवार को उद्यापन किया जाता है। गेहूं के आटे और गुड़ से 'चूरमा' बनाकर हवन किया जाता है। चूरमे के 3 हिस्से करके शिवजी को भोग लगाते हैं और ब्राह्मणों को दान व सात्विक भोजन कराते हैं।#उद्यापन विधि#हवन#प्रसाद चूरमा
उद्यापन और दान21 मंगलवार का व्रत पूरा होने पर उद्यापन कैसे करते हैं?21 व्रत पूरे होने के बाद 22वें मंगलवार को पूजा और हवन किया जाता है। हवन में 'ॐ हं हनुमते नमः' मंत्र के साथ घी, काले तिल, जौ और गुड़ मिलाकर 108 आहुतियां दी जाती हैं।#उद्यापन विधि#हवन#21 मंगलवार