दिव्यास्त्रघटोत्कच की मृत्यु के समय उसने क्या किया?मृत्यु के अंतिम क्षणों में घटोत्कच ने अपना शरीर विशालकाय कर लिया और गिरते हुए कौरव सेना की एक पूरी अक्षौहिणी को कुचल दिया।#घटोत्कच#मृत्यु#अंतिम क्षण
दिव्यास्त्रवासवी शक्ति किस रूप में थी — तलवार, बाण या भाला?वासवी शक्ति भाले या बर्छी के रूप में थी। एक बार छोड़े जाने के बाद यह लक्ष्य को भेदकर ही वापस इंद्र के पास लौटती थी।#वासवी शक्ति#भाला#बर्छी
दिव्यास्त्रक्या वैष्णवास्त्र का वार कभी खाली जाता था?नहीं, वैष्णवास्त्र का वार कभी खाली नहीं जाता था। यह अचूक अस्त्र था जो लक्ष्य को अवश्य भेदता था।#वैष्णवास्त्र#अचूक#खाली नहीं
दिव्यास्त्रक्या सुदर्शन चक्र का वार कभी खाली जाता था?नहीं, सुदर्शन चक्र का वार कभी खाली नहीं जाता। यह लक्ष्य को चाहे जहाँ भी हो खोज निकालता है और नष्ट करके ही वापस लौटता है।#सुदर्शन चक्र#अचूक#खाली नहीं
दिव्यास्त्रप्रलय के समय संवर्त मेघ क्या होता है?प्रलय के समय सात विनाशकारी मेघ प्रकट होते हैं जिनमें से एक का नाम 'संवर्त' है। यह मेघ अत्यधिक जल से भरा होता है और सब कुछ डुबो देता है।#संवर्त मेघ#प्रलय#सात मेघ
दिव्यास्त्रअश्वत्थामा के नारायणास्त्र के समय वरुणास्त्र का प्रयोग क्यों किया गया?जब अश्वत्थामा के नारायणास्त्र से भीम घिर गए तब अर्जुन और कृष्ण ने भीम तक पहुँचने के लिए वरुणास्त्र का प्रयोग किया था।#वरुणास्त्र#नारायणास्त्र#अश्वत्थामा
दिव्यास्त्रयमदण्ड को कालदण्ड क्यों कहते हैं?यमदण्ड को कालदण्ड इसलिए कहते हैं क्योंकि यह 'समय का दण्ड' है — जब किसी का समय पूरा हो जाए तो मृत्यु के विधान से कोई नहीं बचा सकता।#यमदण्ड#कालदण्ड#काल
दिव्यास्त्रगंगाजल मृत्यु के समय क्यों दिया जाता है?गरुड़ पुराण के अनुसार मुख में गंगाजल होने से शरीर और आत्मा पवित्र हो जाते हैं और यमदण्ड नहीं भोगना पड़ता। इसीलिए हिंदू परंपरा में अंतिम समय में गंगाजल देने का विधान है।#गंगाजल#मृत्यु#यमदण्ड
दिव्यास्त्रमृत्यु के समय तुलसी रखने से क्या होता है?मृत्यु के समय सिरहाने तुलसी या मुख में तुलसी पत्ता होने पर यमदूत आत्मा को नहीं ले जाते और स्वयं यमराज भी उस आत्मा को प्रणाम करते हैं।#तुलसी#मृत्यु#यमदूत