श्राद्ध विधिश्राद्ध की तिथि भूल जाएं तो क्या करें?सर्वपितृ अमावस्या (पितृ पक्ष अंतिम दिन) को श्राद्ध करें — सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के लिए। पिता=अष्टमी, माता=नवमी, अकाल मृत्यु=चतुर्दशी। तिल-जल तर्पण + पिंडदान + ब्राह्मण भोजन।#श्राद्ध तिथि#भूल जाना#सर्वपितृ अमावस्या
श्राद्ध विधिश्राद्ध करते समय किस दिशा में मुख रखें?श्राद्ध करते समय कर्ता का मुख अनिवार्य रूप से दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमलोक और पितृलोक की दिशा माना गया है। पितर भी दक्षिण दिशा से ही आते हैं। देव कार्य में पूर्व या उत्तर, और पितृ कार्य में दक्षिण दिशा होती है।#दक्षिण दिशा#श्राद्ध दिशा#पितृ कार्य
श्राद्ध विधिश्राद्ध कर्म करते समय किस दिशा में बैठें?दक्षिण दिशा (यम/पितर दिशा) में मुख। जनेऊ उल्टा (अपसव्य)। कुश आसन, बायाँ घुटना मोड़ें। पिंड/जल दक्षिण में। देव पूजा = उत्तर/पूर्व, पितर = दक्षिण।#श्राद्ध#दिशा#दक्षिण
श्राद्ध विधिपितृपक्ष में श्राद्ध कब करें — तिथि कैसे तय करें?मृत्यु की हिंदू तिथि = पितृ पक्ष की उसी तिथि पर श्राद्ध। तिथि न पता = सर्वपितृ अमावस्या। कुतुप काल (~11:36-12:24) सर्वोत्तम। .com से तिथि निकालें।#पितृपक्ष#श्राद्ध तिथि#मृत्यु तिथि