विस्तृत उत्तर
विंशोत्तरी दशा प्रणाली के अनुसार, यह राजयोग जीवन में तब अपना वास्तविक और चमत्कारी प्रभाव दिखाता है जब जातक को योगकारक ग्रहों (नवम भाव या दशम भाव के स्वामी) की 'महादशा' या 'अंतर्दशा' प्राप्त होती है। यदि जीवनकाल में इनकी दशा ही न आए, तो योग सुप्त अवस्था में ही पड़ा रहता है।




