विस्तृत उत्तर
प्रलय मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं — नैमित्तिक (ब्रह्मा के दिन का अंत), प्राकृत (ब्रह्मा की आयु का अंत) और आत्यंतिक (मोक्ष)। नैमित्तिक प्रलय तब आती है जब ब्रह्मा जी का एक दिन (एक कल्प जिसमें चौदह मन्वंतर होते हैं) समाप्त होता है। विष्णु पुराण के छठे अंश के अनुसार इस समय पृथ्वी पर सौ वर्षों तक भयानक सूखा पड़ता है। तत्पश्चात भगवान विष्णु रुद्र का रूप धारण करते हैं। प्रलयकाल में सूर्य की सात रश्मियाँ सात प्रलयंकारी सूर्यों का रूप धारण कर लेती हैं। इनकी प्रचंड ऊष्मा से पहले भूलोक और फिर भुवर्लोक का पूरा वायुमंडल भस्म हो जाता है। भुवर्लोक नष्ट होने के बाद अग्नि स्वर्लोक को भी जला देती है।
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