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विस्तृत उत्तर
प्रमातामही को आदित्य स्वरूपा इसलिए माना जाता है क्योंकि मातृ-वंश पर भी वसु, रुद्र और आदित्य का त्रि-स्तरीय देव-मैपिंग लागू होता है। इस व्यवस्था में माता वसु स्वरूपा, पितामही या मातामही रुद्र स्वरूपा, और प्रपितामही या प्रमातामही आदित्य स्वरूपा मानी जाती हैं। आदित्य तीसरी पीढ़ी की उच्चतम, प्रकाशमय और मोक्षोन्मुखी पितृ अवस्था का प्रतीक है। इसलिए मातृ-पक्ष की तीसरी पीढ़ी प्रमातामही आदित्य स्वरूपा कहलाती है।
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