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विस्तृत उत्तर
पूर्वाह्न में श्राद्ध वर्जित माना गया है क्योंकि पितृकर्म के लिए शास्त्रों ने मध्याह्न की कुतप वेला को श्रेष्ठ बताया है। श्राद्ध दिन के आठवें मुहूर्त में किया जाना चाहिए। सूर्य की अस्त होती रश्मियों के माध्यम से पितर अपने लोक लौटते हैं, इसलिए समय का सही चयन पितृ तर्पण की प्रभावशीलता के लिए आवश्यक माना गया है।
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