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विस्तृत उत्तर
वैराज प्रजापति की कन्या नद्वला का विवाह चाक्षुष मनु से हुआ था। उनसे उत्पन्न पुत्रों में उरु भी थे। उरु का विवाह आग्नेयी से हुआ, जिनसे अंग, सुमनस, स्वाति, क्रतु, अंगिरस और शिव नामक छह पुत्र हुए। राजा अंग का विवाह सुनीथा से हुआ और उनसे वेन नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। इसी वेन के शरीर-मंथन से परम प्रतापी राजा पृथु का जन्म हुआ। इस प्रकार राजा पृथु का संबंध वैराज वंश से नद्वला, चाक्षुष मनु, उरु, अंग और वेन की वंशावली के माध्यम से बताया गया है।
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