विस्तृत उत्तर
प्राचीन काल में एक तांत्रिक के अंधविश्वास में आकर एक दुष्ट कुम्हार ने अपने मिट्टी के बर्तन पकाने वाले आंवे (भट्टी) में एक गरीब ब्राह्मणी के पांच वर्षीय इकलौते पुत्र को डालकर आग लगा दी। वह पतिव्रता ब्राह्मणी परम गणेश भक्त थी और उस दिन माघ मास की संकष्टी चतुर्थी (सकट चौथ) का व्रत कर रही थी। व्रत के प्रभाव से बच्चा भयंकर आग में भी जीवित और सुरक्षित बच गया।

