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विस्तृत उत्तर
सपिण्डीकरण से पहले सन्यासी उस घर से भिक्षा ग्रहण नहीं करता क्योंकि तब तक प्रेतत्व समाप्त नहीं हुआ होता। जब तक सपिण्डीकरण नहीं होता, घर में कोई शुभ कार्य जैसे विवाह आदि नहीं किए जा सकते और सन्यासी भी उस घर से भिक्षा नहीं लेता। सपिण्डीकरण के पश्चात प्रेत अपनी पहचान त्यागकर पितरों के साथ विलीन हो जाता है और प्रेतत्व समाप्त हो जाता है।
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