विस्तृत उत्तर
सरस्वती पूजा (विशेषकर बसन्त पंचमी) में पीले चावल (अक्षत) अर्पित करने की परम्परा का गहन प्रतीकात्मक अर्थ है।
कारण
1बसन्त ऋतु = पीला रंग
बसन्त पंचमी बसन्त ऋतु का आरम्भ — सरसों के पीले फूलों से खेत सजे। पीला = बसन्त, प्रकृति का उत्सव। अतः सब कुछ पीला — वस्त्र, भोग, फूल, चावल।
2सरस्वती = ज्ञान का प्रकाश
पीला रंग = सूर्य का प्रकाश, ज्ञान, बुद्धि, आध्यात्मिक जागृति। सरस्वती = ज्ञान की देवी। पीला = ज्ञान का प्रतीक रंग।
3बृहस्पति (गुरु) ग्रह
पीला = बृहस्पति (गुरु/ज्ञान) का रंग। सरस्वती + गुरु = विद्या। ज्योतिष में बृहस्पति विद्या, ज्ञान, गुरु का कारक।
4हल्दी = पवित्रता + मंगल
चावल पर हल्दी/केसर मिलाकर पीला बनाते हैं। हल्दी = पवित्रता, शुद्धि, मंगल।
कैसे बनाएँ
शुद्ध चावल (अक्षत — बिना टूटे) + हल्दी पाउडर (चुटकी भर) या केसर = पीले अक्षत। इन्हें सुखाकर सरस्वती के चरणों में अर्पित।
ध्यान दें: केवल सरस्वती ही नहीं, विष्णु पूजा में भी पीले अक्षत और शिव पूजा में श्वेत अक्षत (बिना हल्दी) का विधान है।




