विस्तृत उत्तर
बेलपत्र (बिल्वपत्र) शिव-पूजा का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अर्पण-पदार्थ है। इसका कारण शास्त्रों में बहुत विस्तार से बताया गया है।
शास्त्रीय प्रमाण
शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता)
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्।
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्।।'
— तीन दलों वाला बिल्वपत्र तीन गुण (सत्त्व-रज-तम), तीन नेत्र, तीन कालों का प्रतीक है। इसके अर्पण से तीन जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।
बिल्वपत्र के तीन दलों का प्रतीकार्थ
- 1ब्रह्मा-विष्णु-महेश (त्रिमूर्ति)
- 2इच्छा-ज्ञान-क्रिया (तीन शक्तियाँ)
- 3स्थूल-सूक्ष्म-कारण (तीन शरीर)
- 4सत्त्व-रज-तम (तीन गुण)
स्कंद पुराण (बिल्व माहात्म्य): 'अकाल-बिल्वपत्रेण शिवं पूजयेत् यः।' — जो सूखे/गिरे बिल्वपत्र से भी शिव की पूजा करे, उसे अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।
बिल्व वृक्ष स्वयं शिव का प्रतीक
लिंग पुराण: बिल्व वृक्ष में स्वयं भगवान शिव निवास करते हैं। बिल्व की जड़ में शिव, तने में शिव, पत्तियों में शिव।
नियम
- ▸त्रिदल (तीन पत्तियाँ एकसाथ) = सर्वश्रेष्ठ
- ▸टूटा/कटा/छिद्रयुक्त पत्ता न चढ़ाएँ
- ▸डंठल नीचे रखकर अर्पित करें
- ▸रविवार को तोड़ा बिल्वपत्र वर्जित (सोमवार को तोड़ें)





