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शिव पूजा📜 शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता), स्कंद पुराण (बिल्व माहात्म्य), लिंग पुराण2 मिनट पठन

शिव पूजा में बेलपत्र क्यों चढ़ाते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

बेलपत्र क्यों: शिव पुराण — त्रिदल = त्रिमूर्ति + तीन गुण + तीन काल। तीन जन्मों के पाप नष्ट। स्कंद पुराण: सूखे बिल्वपत्र से भी अश्वमेध-फल। लिंग पुराण: बिल्व वृक्ष में शिव-निवास। नियम: त्रिदल, अखंड, डंठल नीचे, सोमवार को तोड़ें।

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विस्तृत उत्तर

बेलपत्र (बिल्वपत्र) शिव-पूजा का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अर्पण-पदार्थ है। इसका कारण शास्त्रों में बहुत विस्तार से बताया गया है।

शास्त्रीय प्रमाण

शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता)

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्।

त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्।।'

— तीन दलों वाला बिल्वपत्र तीन गुण (सत्त्व-रज-तम), तीन नेत्र, तीन कालों का प्रतीक है। इसके अर्पण से तीन जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।

बिल्वपत्र के तीन दलों का प्रतीकार्थ

  1. 1ब्रह्मा-विष्णु-महेश (त्रिमूर्ति)
  2. 2इच्छा-ज्ञान-क्रिया (तीन शक्तियाँ)
  3. 3स्थूल-सूक्ष्म-कारण (तीन शरीर)
  4. 4सत्त्व-रज-तम (तीन गुण)

स्कंद पुराण (बिल्व माहात्म्य): 'अकाल-बिल्वपत्रेण शिवं पूजयेत् यः।' — जो सूखे/गिरे बिल्वपत्र से भी शिव की पूजा करे, उसे अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।

बिल्व वृक्ष स्वयं शिव का प्रतीक

लिंग पुराण: बिल्व वृक्ष में स्वयं भगवान शिव निवास करते हैं। बिल्व की जड़ में शिव, तने में शिव, पत्तियों में शिव।

नियम

  • त्रिदल (तीन पत्तियाँ एकसाथ) = सर्वश्रेष्ठ
  • टूटा/कटा/छिद्रयुक्त पत्ता न चढ़ाएँ
  • डंठल नीचे रखकर अर्पित करें
  • रविवार को तोड़ा बिल्वपत्र वर्जित (सोमवार को तोड़ें)
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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता), स्कंद पुराण (बिल्व माहात्म्य), लिंग पुराण
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