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विस्तृत उत्तर
यदि पूर्वज दानव या असुर योनि में है, तो श्राद्ध का अन्न उसे विभिन्न भोग-विलास के रूप में प्राप्त होता है। वसु, रुद्र और आदित्य श्राद्ध देवता यजमान द्वारा दिए गए पिण्ड और तर्पण के तत्त्व को उसी ऊर्जा रूप में बदल देते हैं जिस योनि में वह पूर्वज वर्तमान में स्थित है। इसलिए असुर योनि में पितर को पृथ्वी पर दिया गया हविष्य भोग-विलास, सुख-साधन और तृप्ति के रूप में प्राप्त होता है।
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