विस्तृत उत्तर
जम्बू द्वीप के बिल्कुल केंद्र में 'इलावृत वर्ष' स्थित है और उसके ठीक मध्य में सुमेरु (मेरु) पर्वत विराजमान है। मेरु पर्वत भूलोक की ही नहीं अपितु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की धुरी (Axis Mundi) है। इसका महत्व अनेक स्तरों पर है — भौगोलिक दृष्टि से यह सम्पूर्ण जम्बूद्वीप का केंद्र है, खगोलीय दृष्टि से यह ब्रह्माण्ड की लंबवत धुरी है जिसके चारों ओर सूर्य, चंद्र और ग्रह परिक्रमा करते हैं और आध्यात्मिक दृष्टि से इसके शिखर पर साक्षात् ब्रह्मा जी की स्वर्णमयी पुरी 'ब्रह्मपुरी' स्थित है। मेरु पर्वत को चारों दिशाओं से सहारा देने के लिए चार अन्य विष्कम्भ पर्वत स्थापित हैं — पूर्व में मन्दर, दक्षिण में गंधमादन, पश्चिम में विपुल और उत्तर में सुपार्श्व। इस महान पर्वत के चारों ओर चार दिव्य सरोवर — अरुणोद, महाभद्र, शीतोद और मानस — विद्यमान हैं।
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