विस्तृत उत्तर
सुतल लोक में लोग दिव्य औषधियों और उनसे निर्मित रसायनों के प्रभाव से बूढ़े नहीं होते। श्रीमद्भागवत पुराण में बताया गया है कि यहाँ के निवासी अद्भुत और पारलौकिक जड़ी-बूटियों से निर्मित विशेष रसों और रसायनों का अपने दैनिक भोजन, पेय और स्नान में उपयोग करते हैं। इन दिव्य रसायनों के निरंतर सेवन और संपर्क से उन्हें बुढ़ापे के लक्षणों का सामना नहीं करना पड़ता। भागवत पुराण के मूल वर्णन में स्पष्ट है कि सुतल के निवासियों को पलित, यानी बालों का सफेद होना, वली, यानी झुर्रियाँ, और जरा, यानी शारीरिक अक्षमता और बुढ़ापा, का तनिक भी अनुभव नहीं होता।
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