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विस्तृत उत्तर
सुतप्तभवन यममार्ग की 16 मध्यवर्ती पुरियों में बारहवाँ नगर है। यह अत्यंत तप्त और अग्नि के समान गर्म भवन बताया गया है, जहाँ आत्मा भुलसती है। आत्मा नानाक्रन्दपुर के बाद इस नगर में पहुँचती है। यममार्ग स्वयं तपते सूर्य की ज्वालाओं से दग्ध है, और सुतप्तभवन इस दाह और ताप को और अधिक तीव्र रूप में अनुभव कराने वाला स्थान माना गया है।
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