विस्तृत उत्तर
तपोलोक सात ऊर्ध्व लोकों में जनलोक के ऊपर और सत्यलोक के नीचे स्थित है। यह नीचे से छठा और ऊपर से दूसरा लोक है। श्रीविष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार जनलोक से आठ करोड़ योजन ऊपर तपोलोक स्थित है और तपोलोक से बारह करोड़ योजन ऊपर सत्यलोक है। सूर्य से सत्यलोक की कुल दूरी तेईस करोड़ अड़तीस लाख योजन बताई गई है। यह विस्तृत भौगोलिक वर्णन तपोलोक की ब्रह्मांडीय श्रेष्ठता और अकल्पनीय ऊँचाई को प्रमाणित करता है। साथ ही यह लोक भौतिकता, ताप, संहार और अज्ञान से परे विशुद्ध तपस्या, ज्ञान और वैराग्य का क्षेत्र है।
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