'तीक्ष्णदंष्ट्र महाकाय' श्लोक का क्या अर्थ है का सबसे सीधा सार यह है: 'तीक्ष्णदंष्ट्र महाकाय' श्लोक का अर्थ: हे तीखे दांतों वाले, विशाल शरीर वाले, प्रलय की अग्नि के समान भैरव, आपको नमस्कार है — मुझे साधना की आज्ञा प्रदान करें।
ध्यान श्लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 2 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
•उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।
•ध्यान श्लोक श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
•यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।