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विस्तृत उत्तर
तृतीया तिथि को अक्षय इसलिए माना गया है क्योंकि इस दिन किया गया अन्न, जल, तिल और कुश का दान क्षीण न होने वाला फल देता है। पितरों को प्राप्त सूक्ष्म भाग की शक्ति अगले महालय तक बनी रहती है।
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