विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कंध में जब भगवान वामन ने दैत्यराज बलि से तीन पग भूमि मांगकर संपूर्ण त्रिलोकी नाप ली थी तब उन्होंने बलि को सुतल लोक (अतल और वितल के ठीक नीचे स्थित तीसरा अधोलोक) का साम्राज्य सौंप दिया था। इस प्रसंग में अतल, वितल और सुतल लोकों की अपार संपदा और ऐश्वर्य की पुष्टि होती है। भगवान वामन ने बलि को बताया कि सुतल लोक देवराज इंद्र के स्वर्ग से भी अधिक वैभवशाली है और वहाँ उन्हें किसी का भय नहीं होगा। चूंकि अतल लोक सुतल लोक के मार्ग में पड़ने वाला सबसे ऊपरी अधोलोक है इसलिए यह असुरों और दैत्यों का सबसे पहला रक्षण-स्थल माना जाता है।
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