विस्तृत उत्तर
वितल लोक में जाने का कारण मनुष्य के कर्म, चेतना और भौतिक इच्छाएँ हैं। शास्त्रों के अनुसार चौदह लोक मनुष्य की चेतना और कर्मों की आवृत्तियों के भिन्न-भिन्न स्तर हैं। जब कोई मनुष्य जीवन में बहुत अधिक सकाम कर्म करता है, बड़े-बड़े दान देता है और भौतिक उपलब्धियाँ प्राप्त करता है, पर उसके हृदय में भौतिक सुख, स्वर्ण, ऐश्वर्य और विलासिता की तीव्र लालसा बनी रहती है, और वह आध्यात्मिक ज्ञान, वैराग्य या भगवत्प्रेम से शून्य होता है, तो मृत्यु के बाद उसकी आत्मा वितल जैसे बिल-स्वर्गों की ओर आकर्षित होती है।
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