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छिन्नमस्ता — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 2 प्रश्न

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तंत्र साधना

छिन्नमस्ता साधना क्या है?

छिन्नमस्ता = स्वयं-छिन्न-सिर देवी = अहंकार-विसर्जन का प्रतीक। तीन रक्त-धाराएं = इड़ा-पिंगला-सुषुम्ना। मंत्र: 'श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीये...' — गुरु-दत्त। लाल वस्त्र, मंगलवार-अमावस्या। फल: कुण्डलिनी-जागरण, अहंकार-नाश, शक्ति-संचय। अत्यंत उग्र — सामान्य साधक के लिए नहीं।

छिन्नमस्ताआत्मबलिदानकुण्डलिनी
दस महाविद्या

छिन्नमस्ता माता की साधना सबसे कठिन क्यों मानी जाती है?

कठिनतम कारण: (1) उग्रतम स्वरूप — स्वयं मस्तक काटकर रक्तपान। (2) पूर्ण अहंकार नाश = सबसे कठिन। (3) काम पर विजय (रति-काम पर आसीन)। (4) कुण्डलिनी सर्वोच्च अवस्था। (5) श्मशान/रात्रि/गोपनीय। (6) गलत विधि = गंभीर हानि। गुरु दीक्षा अनिवार्य। [समीक्षा आवश्यक]

छिन्नमस्ताकठिनपांचवीं महाविद्या

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।