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भस्म आरती प्रश्नोत्तरी — 4 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित भस्म आरती विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 4 प्रश्न

शिव महिमा

शिव जी भस्म कहाँ से लाते हैं?

शिव जी मुख्यतः चिताभस्म — मृत शरीर के जलने के बाद बची राख — धारण करते हैं, क्योंकि वे महाकाल और श्मशान के स्वामी हैं। भक्तों के लिए यज्ञाग्नि से बनी या गोमय से बनी भस्म का उपयोग किया जाता है।

शिव भस्मचिताभस्ममहाकाल
शिव मंदिर

महाकालेश्वर भस्म आरती में श्मशान भस्म का उपयोग क्यों होता है?

प्राचीन: श्मशान भस्म — शिव = श्मशानवासी, मृत्यु विजयी, वैराग्य संदेश। वर्तमान: श्मशान भस्म का उपयोग नहीं — कपिला गाय गोबर + 6 वृक्ष लकड़ी + कपूर-गुगल से तैयार। भस्म प्रकार: श्रौत, स्मार्त, लौकिक।

श्मशान भस्ममहाकालेश्वरभस्म आरती
शिव मंदिर

उज्जैन महाकालेश्वर की भस्म आरती का रहस्य क्या है?

12 ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकालेश्वर में भस्म आरती। सुबह 4 बजे, ~2 घंटे। पौराणिक: दूषण राक्षस भस्म → शिव श्रृंगार। प्राचीन: श्मशान भस्म; वर्तमान: गाय गोबर + 6 वृक्ष लकड़ी। अघोर मंत्र से भस्म रमाना। निराकार दर्शन = मोक्ष। 6 दैनिक आरतियां।

महाकालेश्वरभस्म आरतीउज्जैन
तीर्थ एवं धार्मिक स्थल

उज्जैन महाकालेश्वर के दर्शन का समय

महाकालेश्वर में भस्म आरती सुबह 4-6 बजे, दद्योदक आरती 7-7:45 बजे, भोग आरती 10-10:45 बजे, संध्या आरती 7-7:45 बजे और शयन आरती रात 10:30-11 बजे होती है। भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग आवश्यक है।

महाकालेश्वरउज्जैनभस्म आरती

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।